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Chandra Mangal Stotra Pdf / चंद्र मंगल स्तोत्र Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Chandra Mangal Stotra Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Chandra Mangal Stotra Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र हिंदी Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Chandra Mangal Stotra Pdf / चंद्र मंगल स्तोत्र पीडीएफ

 

 

 

चंद्र मंगल स्तोत्र Pdf Download

 

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Chandra Mangal Stotra Pdf
Chandra Mangal Stotra Pdf
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बृहस्पति स्तोत्र Pdf Download

 

 

 

 

 

 

Chandra Mangal Stotra in Hindi

 

 

 

चन्द्रः कर्कटकप्रभुः सितनिभश्चात्रेयगोत्रोद्भवम् ।

आग्नेयश्चतुरस्रवा षण्मुखश्चापोऽप्युमाधीश्वरः ।

षट्सप्तानि दशैक शोभनफलः शौरिप्रियोऽर्को गुरुः ।

स्वामी यामुनदेशजो हिमकरः कुर्यात्सदा मङ्गलम् ॥

 

प्रार्थना

 

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।

पूजाविधिं न हि जानामि क्षमस्व परमेश्वर ॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर ।

यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे ॥

रोहणीश सुधामूर्ते सुधारूप सुधाशन ।

सोम सौम्यो भवास्माकं सर्वारिष्टं निवारय ॥

ॐ अनया पूजया चन्द्रदेवःप्रीयताम् ॥

॥ ॐ चन्द्राय नमः ॐ शशाङ्काय नमः ॐ सोमाय नमः ॥

॥ ॐ शान्तिः ॐ शान्तिः ॐ शान्तिः ॐ ॥

इति श्रीचन्द्रमङ्गलस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

2-  विषयो को जहां तक माना जाता है हे भाई! उसको माया समझना चाहिए। उसमे भी एक विद्या और एक अविद्या इन दोनों के भेद को तुम सुनो।

 

 

 

 

3- एक अविद्या दोष युक्त है और अत्यंत दुःख स्वरुप है। जिसके वश होकर जीव संसार रूपी कुए में पड़ा हुआ है और विद्या जिसके वश में गुण है जो जगत की रचना करती है, वह प्रभु से ही प्रेरित होती है। उसका अपना बल कुछ भी नहीं है।

 

 

 

 

4- ज्ञान वह है जिसमे जहां मान आदि एक दोष भी नहीं है। जो सबमे ही समान रूप से ब्रह्म को देखता है। उसी को परम वैराग्यवान कहना चाहिए। जो सारी सिद्धियों को और तीनो गुणों को तिनके के समान ही त्याग चुका हो।

 

 

 

 

जिनमे मान, दम्भ, हिंसा, क्षमाशीलता, आचार्य सेवा का अभाव, अपवित्रता, अस्थिरता, मन का निगृहतन होना, अहंकार, जन्म-मृत्यु, जगत में सुख बुद्धि, स्त्री, पुत्र, घर आदि में आसक्ति।

 

 

 

 

तथा ममता, इष्ट और अनिष्ट की प्राप्ति में हर्ष शोक, भक्ति का अभाव, तथा एकांत में मन न लगना, विषयी मनुष्यो के संगम में प्रेम। यह अठारह न हो और नित्य अध्यात्म में स्थिति तथा तत्व ज्ञान के अर्थ परमात्मा का नित्य दर्शन हो वही ज्ञान कहलाता है।

 

 

 

15- दोहा का अर्थ-

 

 

 

जो माया को ईश्वर को और अपने स्वरुप को नहीं जानता उसे जीव कहना चाहिए। जो कर्मानुसार बंधन और मोक्ष देने वाला, सबसे परे और माया का प्रेरक है वह ईश्वर है।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

1- धर्म के आचरण से वैराग्य और योग से ज्ञान होता है तथा ज्ञान ही मोक्ष को देने वाला है ऐसा वेदो ने वर्णन किया है और हे भाई! जिससे मैं शीघ्र प्रसन्न होता हूँ वह मेरी भक्ति है जो भक्तो को सुख प्रदान करती है।

 

 

 

 

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