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Chandra Kavacham Pdf / चंद्र कवच Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Chandra Kavacham Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Chandra Kavacham Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से चंद्र देव आरती Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Chandra Kavacham Pdf / चंद्र कवचं पीडीएफ

 

 

 

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Chandra Kavacham Pdf
चंद्र कवच Pdf Download यहां से डाउनलोड करे।
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Chandra Kavacham Pdf
राहु कवच Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

तब मारीच ने हृदय में अनुमान किया भेद जानने वाला समर्थ स्वामी, मुर्ख, धनवान, वैद्य, कवि और रसोइया इन नौ व्यक्तियों से बैर विरोध करने में कल्याण और कुशलता नहीं होती है।

 

 

 

 

जब मारीच ने दोनों प्रकार से अपना अहित देखा तब उसने श्री रघुनाथ जी की शरण में जाने से ही अपना कल्याण समझा। सोचा की उत्तर देकर नहीं करते ही यह अभागा मुझे भगा देगा। तो फिर रघुनाथ जी के शरण में क्यों न चला जाऊं।

 

 

 

 

हृदय में ऐसा समझकर वह रावण के साथ। श्री राम जी के चरणों में उसका अखंड प्रेम है। उसके मन में इस बात का अत्यंत हर्ष है कि आज परम सनेही श्री राम जी को देखूंगा किन्तु उसने यह हर्ष रावण को नहीं बताया।

 

 

 

 

छंद का अर्थ-

 

 

 

 

वह मन ही मन सोचने लगा कि अपने परम प्रियतम को देखकर नेत्रों को सफल करके सुख पाउँगा। जानकी जी सहित छोटे भाई लक्ष्मण जी समेत कृपानिधान श्री राम जी के चरणों में मन लगाऊंगा।

 

 

 

 

जिनका क्रोध भी मोक्ष प्रदान करने वाला है और जिनकी भक्ति उन अवश को भी वश में करने वाली है। अहा! वह ही आनंद के समुद्र श्री हरि अपने हाथो से संधान कर भगाएंगे।

 

 

 

 

26- दोहा का अर्थ-

 

 

 

 

मेरे पीछे-पीछे पृथ्वी पर पकड़ने के लिए दौड़ते हुए प्रभु को मैं फिर कई बार देखूंगा। मेरे समान धन्य दूसरा कोई नहीं है।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

जब रावण उस वन के निकट पहुंचा जिस वन में श्री राम जी रहते थे तब मारीच कपट मृग बन गया। वह अत्यंत ही विचित्र था कुछ वर्णन नहीं किया जा सकता। सोने का शरीर मणियों से जड़कर बनाया था।

 

 

 

 

सीता जी ने उस परम सुंदर हिरन को देखा जिसके अंग-अंग की छटा अत्यंत मनोहर थी। वह कहने लगी – हे देव! हे कृपालु रघुवीर! सुनिए, इस मृग बहुत ही सुंदर है।

 

 

 

 

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