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चंदामामा बच्चो की कहानी / Chandamama story Pdf hindi

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Chandamama story Pdf hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Chandamama story Pdf hindi download कर सकते हैं और आप यहां से Vedant Darshan Pdf Hindi कर सकते हैं।

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Chandamama story Pdf hindi

 

 

पुस्तक  का नाम  Chandamama story Pdf hindi
भाषा  हिंदी 
साइज  14.2 Mb 
पृष्ठ  60 
श्रेणी  बाल कहानी 
फॉर्मेट  Pdf 

 

 

 

चंदामामा बच्चो की कहानी Pdf Download

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

वह पति की मृत्यु के बाद स्वयं को समाप्त करना चाहती थी परंतु उनके ससुर ने उन्हें ऐसा करने से रोका। अहिल्याबाई होल्कर को व्यस्त रखने के लिए मल्हार राव होल्कर ने सारा राजपाट अहिल्याबाई होल्कर को सौंप दिया। परंतु अहिल्याबाई होल्कर ने अपने 17 वर्ष के पुत्र मल्हार राव को सिंहासन पर बैठा दिया और स्वयं उनकी संरक्षिका बन कर उनका ध्यान रखती थी।

 

 

 

इसी बीच उत्तर भारत में हो रहे एक अभियान में मल्हार राव ने सहभागिता की और इसी अभियान में कानवी पीड़ा के कारण महाराज मल्हार राव होल्कर की मृत्यु हो गई। अहिल्याबाई होल्कर ने अपने पति और ससुर की मृत्यु हो जाने पर उनकी स्मृति में इंदौर राज्य तथा अन्य राज्यों में विधवाओं, अनाथो, अपंग लोगों के लिए आश्रम बनवाएं।

 

 

 

अहिल्याबाई होल्कर ने ही कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक अनेक मंदिर, घाट, तालाब, दान संस्थाएं, भोजनालय, धर्मशालाएं, बावरियां इत्यादि का निर्माण करवाया। अहिल्याबाई होल्कर ने ही काशी के प्रसिद्ध मंदिर काशी विश्वनाथ और महेश्वर मंदिर तथा वहां पर स्थित घाटों को बनवाया।

 

 

 

इसके अतिरिक्त उन्होंने साहित्यकार कलाकार और गायकों को भी बढ़ावा दिया। अहिल्याबाई होल्कर ने अपने राज्य की रक्षा करने के लिए महिला सैन्य टुकड़ीया बनवायी तथा अनुशासित सैनिकों को भी रखा। इनके इन टुकड़ियों में ऐसे प्रशिक्षित सैनिक थे जिन्हें यूरोप और फ्रांसीसी शैली में प्रशिक्षण प्राप्त करवाया गया था।

 

 

 

अहिल्याबाई के समय देश के अनेक हिस्सों में शासन कर रहे राजाओं द्वारा प्रजा ऊपर काफी अत्याचार होता था लेकिन अहिल्याबाई उन लोगों के लिए मसीहा बनकर आई। इन्होंने हमेशा ही झूठे मोह का त्याग करके लोगों के भलाई के लिए काम किया और सही न्याय किया।

 

 

 

इन्होंने मरते दम तक लोगों के न्याय के लिए काम किया, इसीलिए लोगों ने इन्हें देवी समझ लिया था। उस वक्त जब चारों तरफ गरीब और निस्सहाय लोगों के साथ अत्याचार हो रहे थे, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था, किसान मजदूरों पर जमींदार द्वारा शोषण हो रहा था।

 

 

 

औरतों की स्थिति दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही थी, ऐसी स्थिति में अहिल्याबाई ने उन लोगों के भलाई के बारे में सोचा और उनके भलाई के लिए अनेकों कार्य किया। वह हर दिन अपने प्रजा से बात करती थी, उनकी समस्याओं को सुनती थी और उन्हें हल करती थी। वह बिना भेदभाव के न्याय पूर्वक निर्णय देती थी।

 

 

 

उनके राज्य में जाति के नाम पर भेदभाव की मान्यता नहीं थी। वह सभी प्रजा को एक समान समझती थी। उनके शासनकाल में साम्राज्य का काफी विकास हुआ।

 

 

 

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