Advertisements

Business Book In Hindi Pdf / बिजनेस बुक इन हिंदी Pdf

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Business Book In Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Business Book In Hindi Pdf Download कर सकते हैं और यहां से Madhushala in Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

 

 

Business Book In Hindi Pdf Download

 

 

Advertisements
Business Book In Hindi Pdf
रिच डैड पूअर डैड Pdf यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Business Book In Hindi Pdf
जीत आपकी Pdf यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Business Book In Hindi Pdf
चाणक्य नीति Pdf यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

 

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

निर्धन मनुष्य तपस्या द्वारा और धनी धन के द्वारा देवताओ की आराधना करे। यह बार-बार श्रद्धापूर्वक इस तरह से धर्म का अनुष्ठान करता है और बारंबार पुण्य लोको में अनेक प्रकार के फल भोग कर पुनः इस धरती पर जन्म लेता है। धनवान पुरुष हमेशा भोग सिद्धि के लिए मार्ग में वृक्षादि लगाकर लोगो के लिए छाया की व्यवस्था करे।

 

 

 

 

जलाशय बनवाये। वेद शास्त्रों की प्रतिष्ठा के लिए पाठशाला का निर्माण करे तथा अन्यान्य प्रकार से भी धर्म का संग्रह करता रहे। धनी को यह सब कार्य सदा ही करते रहना चाहिए। समयानुसार पुण्य कर्मो के परिपाक से अन्तःकरण शुद्ध होने पर ज्ञान की सिद्धि हो जाती है।

 

 

 

 

द्विजो! जो इस अध्याय को पढ़ता, सुनता अथवा सुनने की व्यवस्था करता है उसे देवयज्ञ का फल प्राप्त होता है। ऋषियों ने कहा – समस्त पदार्थो के ज्ञाताओं में महान श्रेष्ठ सूत जी! अब आप क्रमशः देश, काल आदि का वर्णन करे।

 

 

 

 

सूत जी ने कहा – महर्षियो! देवयज्ञ आदि कर्मो में अपना शुद्ध घर समान फल देने वाला होता है। अर्थात अपने घर में किए हुए देवयज्ञ आदि शास्त्रोक्त फल को सम मात्रा में देने वाले होते है। गोशाला का स्थान घर की अपेक्षा दस गुना फल देता है।

 

 

 

 

जलाशय का तट उससे भी दस गुना महत्व रखता है तथा जहां तुलसी, बेल एवं पीपल वृक्ष का मूल निकट हो वह स्थान जलाशय के तट से भी दस गुना फल देने वाला होता है। देवालय को उससे भी दस गुने महत्व का स्थान जानना चाहिए। देवालय से दस गुना महत्व रखता है तीर्थभूमि का तट।

 

 

 

 

उससे दस गुना श्रेष्ठ है नदी का किनारा। उससे दस गुना उत्कृष्ट है तीर्थ नदी का तट और उससे भी दस गुना महत्व रखता है सप्तगंगा नामक नदियों का तीर्थ। गोदावरी, सिंधु, नर्मदा, ताम्रपर्णी, गंगा, कावेरी और सरयू इन सात नदियों को सप्तगंगा कहा गया है।

 

 

 

 

समुद्र के किनारे का स्थान इनसे भी दस गुना पवित्र माना गया है और पर्वत के शिखर का प्रदेश समुद्र तट से भी दस गुना पावन है। सबसे अधिक महत्व का वह स्थान जानना चाहिए जहां मन लग जाय। यहां तक देश का वर्णन हुआ काल का तारतम्य बताया जाता है।

 

 

 

 

सत्य युग में दान, यज्ञ आदि कर्म पूर्ण फल देने वाले होते है ऐसा जानना चाहिए। त्रेतायुग में उसका तीन चौथाई फल मिलता है। द्वापर में हमेशा आधे ही फल की प्राप्ति कही गयी है। कलियुग में एक चौथाई ही फल की प्राप्ति समझनी चाहिए और आधा कलियुग बीतने पर उस चौथाई फल में से भी एक चतुर्थांश कम हो जाता है।

 

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Business Book In Hindi Pdf आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Business Book In Hindi Pdf Download की तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

Leave a Comment

error: Content is protected !!