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Brahma Samhita Pdf Hindi / ब्रह्म संहिता Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Brahma Samhita Pdf Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Brahma Samhita Pdf Hindi download कर सकते हैं और आप यहां से Nibandh Nilay Pdf Hindi कर सकते हैं।

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Brahma Samhita Pdf Hindi Download

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

ब्रह्मा जी कहते है – नारद! उस समय देवताओ के साथ शिवगणों का घोर युद्ध आरंभ हो गया। उसमे सारे देवता पराजित हुए और भागने लगे। वे एक दूसरे का साथ छोड़कर स्वर्गलोक में चले गए। उस समय केवल महाबली इंद्र आदि लोकपाल ही उस दारुण संग्राम में धैर्य धारण करके उत्सुकता पूर्वक खड़े रहे।

 

 

 

तदनन्तर इंद्र आदि सब देवता मिलकर उस समरांगण मे वृहस्पति जी को विनीत भाव से नमस्कार करके पूछने लगे। लोकपाल बोले – गुरुदेव वृहस्पते! तात! महाप्राज्ञ! दयानिधे! शीघ्र बताइये हम जानना चाहते है कि हमारी विजय कैसे होगी?

 

 

 

उनकी यह बात सुनकर वृहस्पति जी ने प्रयत्नपूर्वक भगवान शंभु का स्मरण किया और ज्ञान दुर्बल महेंद्र से कहा – इंद्र! भगवान विष्णु ने पहले जो कुछ कहा था वह सब इस समय घटित हो गया। मैं उसी को स्पष्ट कर रहा हूँ। सावधान होकर सुनो।

 

 

 

समस्त कर्मो का फल देने वाला जो कोई ईश्वर है वह कर्ता का ही आश्रय लेता है कर्म करने वाले को ही उस कर्म का फल देता है जो कर्म करता ही नहीं उसको फल देने में भी वह समर्थ नहीं है। अतः जो ईश्वर को जानकर उसका आश्रय लेकर सत्कर्म करता है उसी को उस कर्म का फल मिलता है ईश्वर द्रोही को नहीं।

 

 

 

न मंत्र, न औषधियां, न समस्त आभिचारक कर्म, न लौकिक पुरुष, न कर्म, न वेद, न पूर्व और उत्तर मीमांसा तथा न नाना वेदो से युक्त अन्यान्य शास्त्र ही ईश्वर को जानने में समर्थ होते है ऐसा प्राचीन विद्वानों का कथन है। अनन्यशरण भक्तो को छोड़कर दूसरे लोग सम्पूर्ण वेदो का दस हजार बार स्वाध्याय करके भी महेश्वर को भली भांति नहीं जान सकते यह महाश्रुति का कथन है।

 

 

 

अवश्य भगवान शिव के अनुग्रह से ही सर्वथा शांत निर्विकार एवं उत्तम दृष्टि से सदाशिव के लिए तत्व का साक्षात्कार हो सकता है। सुरेश्वर! क्या कर्तव्य है, क्या अकर्तव्य इसका विवेचन करना अभीष्ट होने पर मैं जो इसमें सिद्धि का उत्तम अंश है उसी का प्रतिपादन करूँगा।

 

 

 

तुम अपने हित के लिए उसे ध्यान देकर सुनो। इंद्र! तुम लोकपालों के साथ आज नादान बनकर दक्ष यज्ञ में आ गए। बताओ तो यहां क्या पराक्रम करोगे? भगवान रूद्र जिनके सहायक है ऐसे ये परम क्रोधी रुद्रगण इस यज्ञ में विघ्न डालने के लिए आये है और अपना काम पूरा करेंगे। इसमें संशय नहीं है।

 

 

 

 

मैं सत्य-सत्य कहता हूँ कि इस यज्ञ के विघ्न का निवारण करने के लिए वस्तुतः तुममें से किसी के पास भी सर्वथा कोई उपाय नहीं है। वृहस्पति की ये बात सुनकर वे इंद्र सहित समस्त लोकपाल बड़ी चिंता में पड़ गए। तब महावीर रुद्रगणों से घिरे हुए भगवान शंकर का स्मरण करके इंद्र आदि लोकपालों को डांटा और इसके पश्चात रुद्रगणों के नायक वीरभद्र ने रोष से भरकर तुरंत ही सम्पूर्ण देवताओ को घायल कर दिया।

 

 

 

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