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Bhavishya Malika Hindi Pdf / भविष्य मलिका Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Bhavishya Malika Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Bhavishya Malika Hindi Pdf Download कर सकते हैं और यहां से 25 + हिंदी सस्पेंस थ्रिलर नोवेल्स पीडीएफ फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

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Bhavishya Malika Hindi Pdf Download

 

 

 

पुस्तक का नाम Bhavishya Malika Hindi Pdf
पुस्तक के लेखक अच्युतानंद
फॉर्मेट Pdf
साइज 12 Mb
पृष्ठ 520
भाषा हिंदी
श्रेणी कहानी

 

 

 

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Bhavishya Malika Hindi Pdf
Bhavishya Malika Hindi Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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Kalchakra ke Rakshak Pdf
कालचक्र के रक्षक Pdf Download
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कालचक्र के रक्षक एक बेहतरीन सस्पेंस, रहस्य, रोमांच से भरा नॉवेल है। आप इसे अवश्य पढ़ें और शेयर भी करें। 

 

 

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आवाज एक डरावना उपन्यास Pdf Download
आवाज एक डरावना उपन्यास Pdf Download
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भविष्य मालिका के बारे में 

 

 

 

भविष्य मालिका की भविष्य वाणी के अनुसार भारत पर चीन और मुसलमानो के द्वारा संयुक्त आक्रमण किया जायेगा। शनि मीन राशि में जाकर वहां पर ढाई साल के लिए बैठ जायेगा।

 

 

 

इस भविष्य मालिका की भविष्य वाणी के अनुसार यदि भारत पर कोई हमला होता है तो देश की बागडोर मजबूत शासक के हाथों में होगी।

 

 

 

भविष्य मालिका की भविष्य वाणी में कहा गया है। एक ऐसे संत के हाथो में बागडोर होगी जो अविवाहित होगा। भारत के बारे में कन्नड़ में लिखी भविष्य वाणी के अनुसार शनि जब मीन राशि में प्रवेश करेंगे उसी समय भारत के ऊपर संकट के बादल घिर जायेंगे।

 

 

 

वर्ष 2024 में शनि कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में जाने वाले है। कन्नड़ की इस भविष्य वाणी के अनुवाद में यह कहा जाता है कि 6 और 7 का योग 13 होता है और इसमें फिर 13 का योग करने पर योगफल 26 होता है और इसी 26 अंक के माध्यम से अच्युतानंद दास ने भविष्य वाणी में लिखा है कि भारत पर देश हमला करेंगे और भारी तबाही होगी।

 

 

 

भविष्य मालिका की भविष्य वाणी के अनुसार योरप की लगभग सभी आबादी का विनाश हो जायेगा कुछ समय पश्चात अमेरिका सागर में विलीन हो जायेगा। लोग कीट पतंगो की तरह समाप्त होते जायेंगे और विश्व की जनसंख्या सीमित होकर 64 करोड़ ही रह जाएगी।

 

 

 

चीन निश्चित रूप से तबाह हो जायेगा और रूस हिन्दू राष्ट्र बन जायेगा। एक योगी पुरुष भारत का अंतिम राजा होगा उसकी कोई संतान नहीं होगी। भविष्य मालिका के अनुसार अंत में रूस सफलता प्राप्त करेगा विजयी रूस को आगामी अवतार अपने वस में करेगा।

 

 

 

भविष्य मालिका के अनुसार वही लोग बचेंगे जो धर्म के मार्ग का अनुसरण करते हुए चलेंगे क्योंकि 2025 के बाद का समय एक विभीषिका के समान होगा। भारत के उड़ीसा प्रान्त में जन्म लेने वाली महान विभूति अच्युतानंद जी महाराज को दिव्य शक्तियों से सम्पन्न बहुत महान योगी और संत माना जाता है।

 

 

 

उन्होंने भविष्य मालिका नामक पुस्तक में भविष्य की बातो का उल्लेख किया है। इस भविष्य की बातो को उन्होंने पांच सौ वर्ष पूर्व ही ताड़ वृक्ष के पत्तो पर ही लिख दिया था वर्तमान समय में उनके द्वारा लिखी भविष्य वाणी चरितार्थ हो रही है। भविष्य मालिका के भविष्य वाणी के अनुसार कलयुग में अकाल, युद्ध, भूचाल, विस्फोट तथा महामारी के साथ ही कई देशो के बारे मे भविष्य वाणी की गयी है।

 

 

 

भविष्य मालिका में ऐसा संकेत प्राप्त होता है कि यह भविष्य में कब घटित होने वाला है। भविष्य मालिका में भारत, रूस और अमेरिका को लेकर भी भविष्य वाणी मिलती है। अच्युतानंद दास महाराज ने जगन्नाथ मंदिर से जुडी भविष्य की घटनाओ के आधार पर विश्व की अनेक घटनाओ का उल्लेख किया है।

 

 

 

उनके द्वारा की गयी भविष्य वाणी में कलयुग के अंत और इस काल में घटित होने वाली घटनाओ का भी जिक्र है। भविष्य मालिका के अनुसार प्राकृतिक घटनाये बहुत ही तबाही मचाएंगी, महंगाई की मार से जनता त्रस्त हो जाएगी तथा आंदोलन करने पर विवश होगी।

 

 

 

हवाएं से लोगो की परेशानी बढ़ जाएगी, विचित्र प्रकार की महामारी और बीमारी से जनता बहुत परेशानी का अनुभव करेगी भविष्य मालिका की भविष्य वाणी के अनुसार वर्तमान समय में सभी घटनाये क्रमशः परिलक्षित हो रही है।

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

फिर गाय के दूध और अन्न के मेल से नैवेद्य तैयार करके प्रणव मंत्र के उच्चारण पूर्वक उसे भगवान शंकर को अर्पित करे। सम्पूर्ण प्रणव को ध्वनि लिंग कहते है। स्वयंभू लिंग नाद स्वरुप होने के कारण नाद लिंग कहा गया है। यंत्र या अर्घा बिंदु स्वरुप होने के कारण बिंदु लिंग के रूप में विख्यात है।

 

 

 

उसमे अचल रूप से प्रतिष्ठित जो शिव लिंग है वह मकार स्वरुप है इसलिए मकार लिंग कहलाता है। सवारी निकालने आदि के लिए जो चर लिंग होता है वह उकार स्वरुप होने से उकार लिंग कहा गया है तथा पूजा की दीक्षा देने वाले जो गुरु है उनका विग्रह अकार का प्रतीक होने से अकार लिंग माना गया है।

 

 

 

 

इस प्रकार अकार, उकार, मकार, बिंदु, नाद और ध्वनि के रूप में लिंग के छः भेद है। इन छहो लिंगो की रोज पूजा करने से साधक जीवन मुक्त हो जाता है इसमें संशय नहीं है। ऋषि बोले – प्रभो! महामुने! आप हमारे लिए क्रमशः षडलिंग स्वरुप प्रणव का माहात्म्य तथा शिव भक्त के पूजन का प्रकार बताइये।

 

 

 

 

सूत जी ने कहा – महर्षियो! आप लोग तपस्या के धनी है आपने यह बड़ा सुंदर प्रश्न उपस्थित किया है। परन्तु इसका ठीक-ठीक उत्तर महादेव जी ही जानते है दूसरा कोई नहीं। तथापि भगवान शिव की कृपा से ही मैं इस विषय का वर्णन करूँगा।

 

 

 

 

वे भगवान शंकर हमारी और आप लोगो की रक्षा का भारी भार बारंबार स्वयं ही ग्रहण करे। प्रकृति से उत्पन्न संसार रूपी महासागर का। प्रणव इससे पार करने के लिए दूसरी नाव है। इसलिए इस ओंकार को प्रणव की संज्ञा देते है। ॐकार अपने जप करने वाले साधको से कहता है।

 

 

 

 

अतः इस भाव को लेकर भी ज्ञानी पुरुष ओम को प्रणव नाम से जानते है। इसका दूसरा भाव यो है। अर्थात यह तुम सब उपासको को बलपूर्वक मोक्ष तक पहुंचा देगा। इस अभिप्राय से भी इसे ऋषि मुनि प्रणव कहते है। अपना जप करने वाले योगियों के तथा अपने मंत्र की पूजा करने वाले उपासक के समस्त कर्मो का नाश करके यह दिव्य नूतन ज्ञान देता है। इसलिए भी इसका नाम प्रणव है।

 

 

 

 

उन मायारहित महेश्वर को ही नूतन कहते है। वे परमात्मा प्रकृष्ट रूप से शुद्ध स्वरुप है इसलिए प्रणव कहलाते है। प्रणव सामक को नविन कर देता है। इसलिए भी विद्वान पुरुष उसे प्रणव के नाम से जानते है। प्रणव के दो भेद बताये गए है स्थूल और सूक्ष्म।

 

 

 

 

एक अक्षर रूप जो ओम है उसे सूक्ष्म प्रणव जानना चाहिए और नमः शिवाय इस पांच अक्षर वाले मंत्र को स्थूल प्रणव समझना चाहिए। जिसमे पांच अक्षर व्यक्त नहीं है वह सूक्ष्म है और जिसमे पांचो अक्षर सुस्पष्ट रूप से व्यक्त है वह स्थूल है। जीवन्मुक्त पुरुष के लिए सूक्ष्म प्रणव के जप का विधान है।

 

 

 

 

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