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11 + Best Numerology Books in Hindi PDF Free Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको 11 + Best Numerology Books in Hindi PDF देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Best Numerology Books in Hindi PDF Download कर सकते हैं और आप यहां से Sampurna Ank Jyotish Hindi PDF भी पढ़ सकते हैं।

 

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Best Numerology Books in Hindi PDF / बेस्ट अंक ज्योतिष बुक पीडीऍफ़ 

 

 

 

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कीरो हस्त रेखा ज्ञान इन हिंदी Pdf Download
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11 + Best Numerology Books in Hindi PDF Free Download
अंक ज्योतिष बुक पीडीएफ 
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बेस्ट अंक ज्योतिष बुक 
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ज्योतिष बुक्स पीडीएफ फ्री
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

249- दोहा का अर्थ-

 

 

 

ने श्रेष्ठ वचन कहा – हे पृथ्वी की पालना करने आने वाले सब राजागण! सुनिए। हम अपनी भुजा उठाकर जनक जी विशाल प्रण कहते है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- राजाओ की भुजाओ का बल चन्द्रमा है। शिव जी का धनुष राहु है। वह भारी है, कठोर है। यह सबको ज्ञात है। बड़े भारी योद्धा, रावण और बाणासुर भी इस धनुष यज्ञ को देखकर चुपके से चलते बने। उसे उठाना तो दूर छूने की हिम्मत भी न हुई।

 

 

 

2- उस शिव जी के को जो आज इस राजसमाज में तोड़ेगा, तीनो लोको की विजय के साथ ही उसे जानकी जी बिना किसी विचार के हठ पूर्वक वरण करेंगी।

 

 

 

3- प्रण सुनते ही सभी राजा ललचा उठे, जिन्हे अपनी वीरता का अभिमान था। वह अपने मन में बहुत ही तमन्नाये। कमर कसकर अकुलाकर उठे और अपने इष्टदेवो को सिर नवाकर चले।

 

 

 

4- वह सब राजा तमक कर बड़े ताव से शिव जी की  की ओर देखते है और फिर निगाह जमकर उसे पकड़ते है, अनेक भांति से जोर लगाते है, पर वह उठता ही नहीं, जिन राजाओ के मन में कुछ भी विवेक है वह शिव के धनुष के पास जाते ही नहीं है।

 

 

 

 

250- दोहा का अर्थ-

 

 

 

मुर्ख राजा लोग किटकिटाकर  को पकड़ते है, परन्तु जब नहीं उठता है तब लज्जित होकर चले जाते है। इस तरह से मानो वह वीरो की भुजाओ का बल पाकर अधिक-अधिक भारी होता जाता है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- तब दस हजार राजा मिलकर एक साथ ही धनु को तो उठाने लगे तो भी वह उनके टालने से भी नहीं टलता था। जैसे कामी पुरुष के वचन से सती स्त्री का मन कभी चलायमान नहीं होता है। वैसे ही शिव जी का धनु भी उन सभी राजाओ से डिगता नहीं था।

 

 

 

2- जैसे बिना वैराग्य के सन्यासी उपहास के पात्र हो जाते है उसी तरह से वह सब राजा भी उपहास के पात्र हो गए। उन लोगो ने अपनी कीर्ति, विजय बड़ी वीरता उस धनु के हाथो ही बरबस गवां दिया और जाकर बैठ गए।

 

 

 

3- सभी राजा लोग हृदय से हारकर श्री हीन हो गए और हतप्रभ होकर अपने-अपने समाज में जाकर बैठ गए। राजाओ को असफल होता देखकर जनक अकुला उठे और क्रोध में सने हुए वचन बोले।

 

 

 

4- अनेको द्वीप के राजा लोग हमारे प्रण को सुनकर आये है। देवता, दैत्य भी मनुष्य के रूप धारण करके आये और बहुत से रणधीर वर आये है।

 

 

 

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