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Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi Pdf / बगलामुखी साधना और सिद्धि pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  बगलामुखी रहस्य बुक Pdf भी पढ़ सकते हैं।

 

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Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi Pdf

 

 

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Baglamukhi Sadhana Aur Siddhi Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

 

स्त्रियां बच्चे और बूढ़े दर्शन नहीं मिलने से हाथ मलकर पछताते है। इस प्रकार जहां भी श्री राम जी जाते है वहां के सभी लोग प्रेम के वश में हो जाते है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- सूर्यकुल रूपी कुमुदिनी को प्रफुल्लित करने वाले चन्द्रमा स्वरुप श्री राम जी दर्शन करके प्रत्येक गांव में सभी लोग आनंदित हो रहे है। जो लोग वनवास दिए जाने का कुछ भी समाचार सुन पाते है वह लोग राजा-रानी को दोषी बनाते है।

 

 

 

2- कोई कहता है – राजा बहुत ही अच्छे है जो हमे अपने नेत्रों का लाभ दिए। स्त्री-पुरुष आपस में स्नेह भरी सीधी और सुंदर बात कर रहे है।

 

 

 

3- वह कहते है – इनके माता-पिता धन्य है, जिन्होंने इन्हे जन्म दिया, वह नगर धन्य है जहां से यह आये है। वह देश, पर्वत, वन और गांव धन्य और वह स्थान भी धन्य है जहां-जहां यह जाते है।

 

 

 

 

4- ब्रह्मा ने उसे भी रचकर सुख पाया जिसके यह (श्री राम जी) सब प्रकार से स्नेह रखते है। पथिक रूप श्री राम लक्ष्मण की सुंदर कथा सारे रास्ते और जंगल में छा गई है।

 

 

 

122- दोहा का अर्थ-

 

 

 

जैसे रघुकुल रूपी कमल जिन श्री राम जी रूपी सूर्य से खिलता है वह श्री राम जी मार्ग के लोगो को इसी प्रकार से सुख देते हुए सीता जी और लक्ष्मण जी सहित वन को देखते हुए चले जा रहे है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- आगे श्री राम जी है और पीछे लक्ष्मण जी शोभायमान हो रहे है। दोनों तपस्वयी के वेश में बहुत ही शोभा पा रहे है। दोनों के बीच में सीता जी इस प्रकार शोभित हो रही है जैसे ब्रह्म और जीव के बीच में माया।

 

 

 

 

2- फिर अपने मन में बसी हुई छवि का वर्णन करता हूँ मानो बसंत ऋतु और कामदेव के बीच में कामदेव की पत्नी रति शोभित हो, फिर अपने हृदय में ढूढ़कर उपमा कहता हूँ मानो (बुध) चन्द्रमा के पुत्र और चन्द्रमा के बीच में रोहिणी (चन्द्रमा की स्त्री) शोभा पा रही हो।

 

 

 

 

3- प्रभु श्री राम जी के जमीन पर अंकित होने वाले दोनों चरण चिन्हो के बीच-बीच में पैर रखती हुई सीता जी इस बात से डरती हुई कही भगवान के चरण चिन्हो पर पैर न टिक जाय, मार्ग में चल रही है और लक्ष्मण जी मर्यादा की रक्षा के लिए सीता जी और श्री राम जी के दोनों चरण चिन्हो को बचाते हुए उन्हें दाहिने रखकर रास्ते पर चल रहे है।

 

 

 

 

4- श्री राम जी, लक्ष्मण जी और सीता जी की सुंदर प्रीति वाणी का विषय नहीं है अर्थात अनिवर्चनीय है, अतः वह कैसे कही जा सकती है? पशु और पक्षी भी उस छवि को देखकर प्रेमानंद में मग्न हो जाते है। पथिक रूप श्री राम जी ने उनके ही चित्त चुरा लिए है।

 

 

 

 

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