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Baglamukhi Rahasya Book Pdf / बगलामुखी रहस्य बुक Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Baglamukhi Rahasya Book Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Baglamukhi Rahasya Book Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से वशीकरण मंत्र Pdf भी पढ़ सकते हैं।

 

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Baglamukhi Rahasya Book Pdf / बगलामुखी रहस्य बुक पीडीएफ

 

 

 

बगलामुखी रहस्य बुक Pdf Download

 

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Baglamukhi Rahasya Book Pdf
Baglamukhi Rahasya Book Pdf
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

 

प्रतिकूल विधाता की करनी बड़ी कठोर है, जिसने माता कैकेयी को बावली बना दिया (उसकी मति फेर दी) उस रात को प्रभु श्री राम जी बार-बार आपकी सराहना कर रहे थे।

 

 

 

 

तुलसीदास जी कहते है कि (निषाद राज कहता है कि) श्री राम जी को आपके समान अतिशय प्रिय और कोई नहीं है। मैं सौगंध खाकर कहता हूँ कि परिणाम में मंगल होगा। यह जानकर आप अपने हृदय में धैर्य धारण करिये।

 

 

 

201- दोहा का अर्थ-

 

 

श्री राम जी अन्तर्यामी तथा संकोच, प्रेम और कृपा के धाम है, यह विचारकर और मन में दृढ़ता लाकर चलिए विश्राम करिये।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

1- सखा के वचन सुनकर, हृदय में धीरज रखकर श्री राम जी का स्मरण करते हुए भरत जी डेरा की ओर चले। नगर के सारे स्त्री-पुरुष यह (श्री राम जी के ठहरने का स्थान) का समाचार पाकर बड़े आतुर होकर उस स्थान को देखने चले।

 

 

 

2- वह उस स्थान की परिक्रमा करके प्रणाम करते है और कैकेयी को बहुत दोष देते है। नेत्रों में जल भरकर प्रतिकूल विधाता को दोष देते है।

 

 

 

3- कोई भरत जी की सराहना करता है कोई कहता है राजा ने अपना प्रेम खूब निबाहा। सब अपनी निंदा करते हुए निषाद की प्रसंशा करते है। उस समय के विमोह और विषाद को कौन कह सकता है।

 

 

 

 

4- इस प्रकार सब लोग रात भर जागते रहे। सबेरा होते ही नाव का खेवा लगा। सुंदर नाव पर गुरु जी को चढ़ाकर फिर नयी नाव पर सब माताओ को चढ़ाया।

 

 

 

 

5- चार घड़ी में सब गंगा जी के पार उतर गए। तब भरत जी ने सबको उतरकर संभाला।

 

 

 

 

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