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10 + Ayurveda Books Pdf in Hindi / आयुर्वेद बुक्स Pdf Free

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मित्रों इस पोस्ट में Ayurveda Books Pdf in Hindi दिया जा रहा है। आप नीचे की लिंक से आयुर्वेद बुक्स Pdf Free Download कर सकते हैं।

 

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Ayurveda Books Pdf in Hindi आयुर्वेद बुक्स Pdf Free

 

 

 

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10 + Ayurveda Books Pdf in Hindi
यहां से ज्वर ( बुखार ) के कारण और चिकित्सा पीडीएफ डाउनलोड करे।
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सुगम चिकित्सा पीडीऍफ़ डाउनलोड
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सूर्य चिकित्सा पीडीऍफ़ डाउनलोड
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जल चिकित्सा पीडीएफ डाउनलोड
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चरक संहिता पीडीएफ डाउनलोड
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Ayurveda Books Pdf in Hindi
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मिट्टी चिकित्सा पीडीएफ डाउनलोड  
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सचित्र आयुर्वेद हिंदी में पीडीएफ मुफ्त डाउनलोड
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आयुर्वेद प्रकाश पीडीएफ डाउनलोड
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आयुर्वेदिक खाना खजाना पीडीएफ डाउनलोड
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Note- हम कॉपीराइट का पूरा सम्मान करते हैं। इस वेबसाइट Pdf Books Hindi द्वारा दी जा रही बुक्स, नोवेल्स इंटरनेट से ली गयी है। अतः आपसे निवेदन है कि अगर किसी भी बुक्स, नावेल के अधिकार क्षेत्र से या अन्य किसी भी प्रकार की दिक्कत है तो आप हमें [email protected] पर सूचित करें। हम निश्चित ही उस बुक को हटा लेंगे। 

 

 

 

 

आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ है ‘जीवन का विज्ञान’ या कह लीजिए ‘जीवन जीने की पद्धति’ जिसके नियम का पालन करते हुए मनुष्य स्वस्थ्य जीवन बिता सके उसे ही आयुर्वेद कहते है।

 

 

 

 

आयुर्वेद जैसा कि नाम से परिलक्षित होता है। वेद के कथनानुसार मनुष्य का आचरण स्वास्थ्य होकर लम्बी आयु प्राप्त करे वही आयुर्वेद कहलाता है। इसका उपयोग प्राचीन काल से होता आ रहा है।

 

 

 

 

इसके प्राचीन ऋषि आचार्य सुश्रुत है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का दैवीय प्रचारक माना जाता है। आयुर्वेद का उपयोग 5000 वर्ष से अधिक समय से हो रहा है। आयुर्वेद एक ऐसा ज्ञान है जो पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित होने के कारण ही चलता जा रहा है।

 

 

 

 

आयुर्वेद के अनुसार (कफ, पित्त, वात) इन तीन दोष के कारण ही मनुष्य पीड़ित (रोगी) हो जाता है। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर इन तीन दोष का नपा तुला संतुलन रहता है। यह दोष व्यक्ति के भोजन व्यायाम और अन्य कारणों से प्रभावित होते है।

 

 

 

 

आयुर्वेद में ‘ओजस’ मनुष्य के शरीर का अंतिम ‘सार’ है और मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली का आधार है। यह शरीर के हर हिस्से में व्याप्त रहता है। ‘ओजस’ कम होने से ही मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित हो जाती है फलतः मनुष्य को बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

 

 

 

वह दुर्बल हो जाता है। आयुर्वेद के द्वारा बनाई गई दवाओं से कोई भी और किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। इससे मनुष्य को शरीरिक सुरक्षा प्रदान होती है।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

यह सोचकर झूठा स्नेह बढ़ाकर मैं हठ नहीं करती। बेटा! मैं बलैया लेती हूँ, माता का नाता जानकर मेरे सुध भूल मत जाना।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- हे गोसाई! सब देव और पितर तुम्हारी उसी तरह से रक्षा करे जिस तरह से पलके आंखो की रक्षा करती है। तुम्हारे वनवास की अवधि ‘चौदह वर्ष’ जल है। प्रियजन और कुटुंबी मछली है, तुम दया के सागर और धर्म की धुरी को धारण करने वाले हो।

 

 

 

2- ऐसा विचार करते हुए तुम वही उपाय करना जिससे सबके जीते जी तुम आकर मिलो। मैं बलिहारी जाती हूँ। तुम सेवको, परिवारों और सभी नगर के लोगो को अनाथ करके सुख पूर्वक वन को जाओ।

 

 

 

 

3- आज सबके पुण्य का फल पूरा हो गया। कठिन काल हमारे विपरीत हो गया। इस प्रकार बहुत विलाप करके और अपने को परम अभागिनी जानकर माता कौशल्या जी श्री राम जी के चरणों से लिपट गई।

 

 

 

 

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