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Ayurveda Books Pdf Hindi / मिट्टी चिकित्सा पीडीएफ

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Ayurveda Books Pdf Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Ayurveda Books Pdf Hindi Download कर सकते हैं।

 

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Ayurveda Books Pdf Hindi
यहां से कामकलाविलास पीडीऍफ़ डाउनलोड करें।
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सुगम चिकित्सा पीडीऍफ़ डाउनलोड
यहां से सुगम चिकित्सा पीडीऍफ़ डाउनलोड करे।
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यहां से ज्वर ( बुखार ) के कारण और चिकित्सा पीडीएफ डाउनलोड करे।
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सूर्य चिकित्सा पीडीऍफ़ डाउनलोड
यहां से सूर्य चिकित्सा पीडीऍफ़ डाउनलोड करे।
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जल चिकित्सा पीडीएफ डाउनलोड
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चरक संहिता पीडीएफ डाउनलोड
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Ayurveda Books Pdf Hindi
यहां से भारतीय औषधि पीडीऍफ़ डाउनलोड करे।
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मिट्टी चिकित्सा पीडीएफ डाउनलोड  
यहां से मिट्टी चिकित्सा पीडीएफ डाउनलोड करे।
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सचित्र आयुर्वेद पीड़ीएफ डाउनलोड 
यहां से सचित्र आयुर्वेद पीड़ीएफ डाउनलोड करे।
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आयुर्वेद प्रकाश पीडीएफ डाउनलोड
यहां से आयुर्वेद प्रकाश पीडीएफ डाउनलोड करे।
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आयुर्वेदिक खाना खजाना पीडीएफ डाउनलोड
यहां से आयुर्वेदिक खाना खजाना पीडीएफ डाउनलोड करे।
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मंत्री ने देखकर ‘जय जीव’ कहकर दंडवत प्रणाम किया। सुनते ही राजा व्याकुल होकर उठे और बोले – सुमंत्र! कहो राम कहां है?

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- राजा ने सुमंत्र को हृदय से लगा लिया। मानो डूबते हुए आदमी को कुछ सहारा मिल गया हो। मंत्री को स्नेह के साथ पास बैठाकर, नेत्रों में जल भरकर राजा पूछने लगे।

 

 

 

2- हे मुझसे सनेह रखने वाले सखा! श्री राम की कुशल कहो। बताओ, श्री राम, लक्ष्मण और जानकी कहां है। उन्हें लौटा लाये हो कि वह वन को चले गए? यह सुनते ही मंत्री के नेत्रों में जल भर आया।

 

 

 

3- शोक से व्याकुल होकर राजा फिर पूछने लगे – सीता, राम और लक्ष्मण का संदेशा तो काहो। श्री राम जी के गुण रूप, शील और स्वभाव को याद करके राजा हृदय में सोच करते है।

 

 

 

4- और कहते है – मैंने राजा होने की बात सुनाकर वनवास दे दिया, यह सुनकर भी जिस (राम) के मन में हर्ष और विषाद नहीं हुआ, ऐसे पुत्र के बिछुड़ने पर भी मेरे प्राण नहीं गए। तब मेरे समान बड़ा पापी कौन होगा।

 

 

 

हे सखा! श्री राम, जानकी लक्ष्मण जहां है मुझे भी वही पहुंचा दो। नहीं तो मैं सत्य भाव से कहता हूँ कि मेरे प्राण अब चलना चाहते है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- राजा बार-बार मंत्री से पूछते है – मेरे प्रिय पुत्रो का संदेशा सुनाओ, हे सखा! तुम तुरंत ही वह उपाय करो, जिससे मैं श्री राम, सीता और लक्ष्मण को मैं अपनी आँखों से देख सकूँ।

 

 

 

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