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Aushadhi Vanaspati Ki Jankari Pdf / औषधि वनस्पति जानकारी PDF

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Aushadhi Vanaspati Ki Jankari Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Aushadhi Vanaspati Ki Jankari Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से औषधीय पौधों के नाम और उपयोग पीडीऍफ़ डाउनलोड भी पढ़ सकते हैं।

 

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Aushadhi Vanaspati Ki Jankari Pdf 

 

 

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Aushadhi Vanaspati Ki Jankari Pdf
औषधि वनस्पति जानकारी पीडीएफ डाउनलोड 
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

हे तात! जिनके स्वामी, सखा, पिता, माता और गुरु सब कुछ आप ही है, उनके मन रूपी मंदिर में सीता सहित आप दोनों भाई निवास कीजिए।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- जो अवगुणो को छोड़कर सबके गुणों को ग्रहण करते है, ब्राह्मण और गौ के लिए संकट सहते है, निति निपुणता मे जिनकी जगत में मर्यादा है। उनका सुंदर मन ही आपका घर है।

 

 

 

2- जो गुणों को आपका और दोष को अपना समझता है, रामभक्त जिसे प्यारे लगते है और जिसे सब प्रकार से आपका ही भरोसा है, उसके हृदय में सीता सहित आप निवास करिये।

 

 

 

 

3- जाति, पाति, धन, धर्म, बड़ाई, प्रिय परिवार और सुख देने वाला घर – सबको छोड़कर जो केवल आपको ही अपने हृदय में धारण किए रहता है। हे रघुनाथ जी! आप उसके हृदय में रहिए।

 

 

 

 

4- स्वर्ग नरक और मोक्ष जिसकी दृष्टि में समान है, क्योंकि वह जहां भी देखते है और जो कर्म से, वचन से और मन से आपका दास है। हे राम जी! आप उसके हृदय में डेरा कीजिए।

 

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- श्री राम जी के वियोग में ऐसे व्याकुल होकर खड़े है मानो उन्हें चित्र की भांति बना दिया गया हो। नगर मानो फल से परिपूर्ण सघन वन था। नगरवासी बहुत से पशु-पक्षी थे। अर्थात अवधपुरी अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष इन चारो फलो को देने वाली नगरी थी और सब नगरवासी सुखी होकर उन फलो को प्राप्त करते थे।

 

 

 

2- विधाता ने कैकेयी को  बनाया, जिसने दशो दिशाओ में दुःसह दावाग्नि ‘भयानक आग’ लगा दिया। श्री राम जी की विरह की अग्नि को लोग सह नहीं पाए और सब लोग भाग चले।

 

 

 

3- सभी ने विचार किया कि श्री राम जी, लक्ष्मण जी और सीता जी के बिना कदापि सुख नहीं है। जहां श्री राम जी रहेंगे वही सारा समाज रहेगा। श्री राम जी हम लोगो का अयोध्या में कुछ काम नहीं है।

 

 

 

 

4- ऐसा विचार करते हुए देवताओ को भी दुर्लभ सुख से पूर्ण घर को छोड़कर श्री राम जी के साथ चल पड़े। जिन्हे श्री राम जी के चरण कमल प्यारे है क्या उन्हें कभी विषय भोग अपने वश में कर सकते है।

 

 

 

 

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