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Atri Smriti in Hindi Pdf / अत्रि स्मृति Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Atri Smriti in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Atri Smriti in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से शंख स्मृति pdf भी पढ़ सकते हैं।

 

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Atri Smriti in Hindi Pdf / अत्रि स्मृति पीडीऍफ़ 

 

 

 

अत्रि स्मृति पीडीएफ डाउनलोड 

 

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Atri Smriti in Hindi Pdf
Atri Smriti in Hindi Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

सबेरा होते ही यदि राम मुनि का वेश धारण करके यदि राम वन को नहीं जाते है तो हे राजन! निश्चय ही मन में समझ लीजिए कि मेरा मरण होगा और आपका अपयश।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

1- ऐसा कहकर कुटिल हृदय कैकेयी उठकर खड़ी हो गयी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि साक्षात् क्रोध की नदी ही तीव्र गति से उमड़ पड़ी हो। वह नदी  रूपी पहाड़ से प्रकट हुई है और क्रोध रूपी जल से भरी है और ऐसी भयानक है कि उसे देखने में भी डर लगता है।

 

 

 

2- दोनों वरदान उस नदी के दो किनारे है। कैकेयी का कठिन हठ ही उसकी तीव्र गति वाली धारा है और कुबड़ी मंथरा के वचन की प्रेरणा ही भंवर है। वह राजा दशरथ रूपी वृक्ष को जड़-मूल से उखाड़ती हुई विपत्ति रूपी समुद्र की ओर सीधी आ रही है।

 

 

 

 

3- राजा ने समझ लिया कि बात एकदम वास्तव में सच्ची है। स्त्री के बहाना स्वरुप ही मेरे सिर के ऊपर मौत नाच रही है। तदनन्तर राजा ने कैकेयी के चरण पकड़ते हुए उससे विनीत भाव में अपने पास बिठा कर कहा कि तू क्यों सूयकुल रूपी वृक्ष के लिए बन रही है। तू मुझे राम के विरह में मत मार  किसी भांति तू राम को रख ले, नहीं तो पूरे जीवन भर तेरी छाती जलती रहेगी।

 

 

 

 

कैकेयी फिर कड़वे और कठोर वचन बोली। मानो घाव में भर रही हो। वह कहती है – कि अंत में ऐसा ही करना था तो मांग-मांग किस बल पर कहा था।

 

 

 

3- हे राजा! ठहाका मारकर हंसना और गाल फुलाना ‘नाराज होना’ क्या दोनों एकसाथ हो सकता है? दानी भी कहाना और कंजूसी भी करना। क्या राजपूत होने में कुशल क्षेम भी रह सकती है? अर्थात लड़ाई में बहादुरी भी दिखावे और कही घाव भी न लगे।

 

 

 

 

4- या तो वचन (प्रतिज्ञा) ही छोड़ दीजिए या फिर धैर्य धारण करिये। यो ही किसी असहाय स्त्री की भांति रुदन मत करिये। सत्यव्रती के लिए तो शरीर, स्त्री, पुत्र, घर, धन और पृथ्वी सब तिनके बराबर ही कहे गए है।

 

 

 

 

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