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Assam Bengal Ka Jadu Pdf / आसाम बंगाल का जादू किताब pdf download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Assam Bengal Ka Jadu Pdf  देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Assam Bengal Ka Jadu Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Lal Kitab Pdf in Hindi पढ़ सकते हैं।

 

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Assam Bengal Ka Jadu Pdf / आसाम बंगाल का जादू किताब पीडीऍफ़ 

 

 

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Assam Bengal Ka Jadu Pdf
यहां से आसाम बंगाल का जादू किताब पीडीऍफ़ डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

 

देवता हर्षित होकर फूल बरसा रहे है और अप्सराये गान कर रही है। अवधपति दशरथ जी नगाड़े बजाकर आनंद पूर्वक अयोध्यापुरी को चले।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- राजा दशरथ जी ने विनती करके प्रतिष्ठित जनो को लौटाया और आदर के साथ जो याचक (मांगने वाले) थे उनको बुलवाया और उनको गहने कपड़े घोड़े हाथी दिए और प्रेम से पुष्ट करके सबको सम्पन्न कर दिया।

 

 

 

 

2- वह सब बारंबार विरुदावली कुल कीर्ति की बड़ाई करते हुए और श्री राम जी को हृदय में रखकर लौट गए। कोशलाधीश दशरथ बार-बार जनक को लौटने के लिए कहते है पर जनक जी प्रेम वश लौटना नहीं चाहते है।

 

 

 

 

3- दशरथ जी ने फिर सुहावने वचन कहे – हे राजन! आप बहुत दूर तक आ गए है, अब लौटिये। फिर राजा दशरथ जी रथ से उतरकर खड़े हो गए और उनके नेत्रों में प्रेम का प्रवाह बढ़ गया।

 

 

 

 

4- तब जनक जी हाथ जोड़कर मानो स्नेह रूपी अमृत में डूबे हुए वचन बोले – मैं किस प्रकार बनाकर ‘किन शब्दों में’ आपकी विनती करू। हे महाराज! आपने मुझे बहुत ही बड़ाई दिया है।

 

 

 

 

340- दोहा का अर्थ-

 

 

 

अयोध्या नाथ दशरथ जी ने अपने स्वजन समधी का सब प्रकार से सम्मान किया। उनके आपस के मिलन में अत्यंत विनय थी और इतनी प्रीति थी जो हृदय में समा नहीं सकती थी।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- जनक जी ने मुनि मंडली को सिर नवाकर आशीर्वाद लिया फिर आदर के साथ वह रूप, शील और गुणों के निधान अपने सभी जामाता (दामाद) से मिले।

 

 

 

 

2- और सुंदर कमल के समान अपने हाथो को जोड़कर प्रेम से जन्मे हुए वचन बोले – हे श्री राम जी! मैं किस प्रकार से आपकी प्रसंशा करू। आप तो मुनियो और महादेव जी के मनरूपी मानसरोवर के हंस है।

 

 

 

3- योगी लोग जिनके लिए क्रोध, मोह, ममता और मद को त्यागकर योग साधना करते है जो सर्व व्यापक, ब्रह्म, अव्यक्त, अविनाशी, चिदानंद और गुणों की राशि है।

 

 

 

4- जिनको मन सहित वाणी नहीं जानती और सब जिनका अनुमान ही करते है। कोई भी तर्क नहीं कर सकते, जिनकी महिमा को वेद ‘नेति’ कहकर वर्णन करता है और जो ‘सच्चिदानंद’ तीनो कालो में एक रस (सर्वदा, सर्वथा और निर्विकार) रहते है।

 

 

 

मुनि के वचन सुनकर भरत के हृदय में सोच हुआ कि यह तो बिना मौका ही कठिन संकोच आ गया। फिर गुरुजनो की वाणी को महत्वपूर्ण (आदरणीय) समझकर चरण वंदना करके हाथ जोड़कर बोले।

 

 

 

 

2- हे नाथ! आपकी आज्ञा को शिरोधार्य करके उसका पालन करना यह हमारा धर्म है। भरत जी के यह वचन मुनि श्रेष्ठ के मन को अच्छे लगे। उन्होंने विश्वपात्र सेवको और शिष्यों को पास बुलाया।

 

 

 

 

3- और कहा कि भरत की पहुनाई करनी है, तुम लोग जाकर कंद, मूल और फल लाओ, उन्होंने हे नाथ! बहुत अच्छा कहकर सिर नवाया और आनंद होकर अपने काम को चल दिए।

 

 

 

 

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Assam Bengal Ka Jadu Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Assam Bengal Ka Jadu Pdf Download कर सकते हैं।

 

 

 

 

 

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