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अंत्येष्टि कर्म पद्धति pdf / Antyakarm shradh prakash pdf Hindi

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Antyakarm shradh prakash pdf Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Antyakarm shradh prakash pdf Hindi download कर सकते हैं और आप यहां से 10 + Shiv bhajan Sangrah Pdf कर सकते हैं।

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Antyakarm shradh prakash pdf Hindi

 

 

पुस्तक का नाम  Antyakarm shradh prakash pdf Hindi
पुस्तक के लेखक 
भाषा  हिंदी 
साइज  2.3 Mb 
पृष्ठ  431 
श्रेणी  धार्मिक 
फॉर्मेट  Pdf 

 

 

 

अंत्येष्टि कर्म पद्धति pdf Download

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये

 

 

तत्पश्चात अनेक प्रतापी राजा भी उनके अनुयायी बन गये। उंका धर्म भारत के बाहर भी तेजी से फैला और आज भी बौद्ध धर्म चीन, जापान आदि कई देशों का प्रधान धर्म है। उनके द्वारा बताये गयी बातो की स्थानिक लोग बड़ी श्रद्धा से मानते थे और उनकी मृत्यु के बाद भी लोग उनके द्वारा बताये गए रास्तो पर चलते थे और उनकी बातो का पालन करते थे।

 

 

 

उनकी बातो को कई लोगो ने अपने जीवन में अपनाकर अपना जीवन समृद्ध बनाया है और उनकी मृत्यु के 400 साल बाद भी लोग उन्हें भगवान का रूप मानते थे। महात्मा बुद्ध के उपदेश बड़े ही सीधे और सरल थे। उन्होंने कहा था कि समस्त संसार दु:खों से भरा हुआ है और यह दु:ख का कारण इच्छा या तृष्णा है।

 

 

 

इच्छाओं का त्याग कर देने से मनुष्य दु:खों से छूट जाता है। उन्होंने लोगों को ये भी बताया कि सम्यक-दृष्टि, सम्यक- भाव, सम्यक- भाषण, सम्यक-व्यवहार, सम्यक निर्वाह, सत्य-पालन, सत्य-विचार और सत्य ध्यान से मनुष्य की तृष्णा मिट जाती है और वह सुखी रहता है।

 

 

 

भगवान बुद्ध के उपदेश आज के समय में भी बहुत प्रासंगिक हैं।महात्मा बुद्ध का जीवन वाकई प्रेरणा देना वाला है। उन्होंने मानवता की मुक्ति का मार्ग ढूंढने के लिए उन्होंने खुद राजसी भोग विलास त्याग दिया और कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना किया।

 

 

 

उन्होनें ज्ञान और सत्य की खोज के लिए कठोर साधना की। जिसके बाद ही उन्हें बिहार में बोधिवृक्ष के नीचे तत्वज्ञान प्राप्त हुआ।महात्मा बुद्ध ने अपने 5 शिष्यों को दिक्षा भी दी थी यहां तक कि कई बुद्धिमान और प्रतापी राजा भी महात्मा बुद्ध के उपदेशों को ध्यानपूर्वक सुनते थे और उनका अनुसरण करते थे और वे भी गौतम बुद्ध के अनुयायी बन गए थे।

 

 

 

इस तरह बौद्ध धर्म भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बड़ी तेजी से फैल गया था।भगवान गौतम बुद्ध के मुताबिक मानव जीवन दुखों से भरा पड़ा है। उन्होंने बताया कि पूरे संसार मे सारी वस्तुएं दु:खमय है। इसके अलावा भगवान गौतम बुद्ध में मानव जीवन और मरण के चक्र को दुखों का मूल कारण माना और बताया कि किसी भी धर्म का मूल उद्देश्य मानव को इस जन्म और मृत्यु के चक्र से छुटकारा दिलाना होना चाहिए।

 

 

 

सम्यक दृष्टि

सत्य तथा असत्य को पहचानने कि शक्ति। महात्मा बुद्ध के मुताबिक जो भी शख्स दुखों से मुक्ति जाना चाहता है। उसमें सत्य और असत्य को पहचानने की शक्ति होनी चाहिए।

 

सम्यक संकल्प
इच्छा एवं हिंसा रहित संकल्प। महात्मा बुद्ध के मुताबिक जो लोग दुखों से मुक्ति पाना चाहते हैं। उन्हें ऐसे संकल्प लेने चाहिए जो कि हिंसा रहित हो और उनकी इच्छा प्रवल।

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