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Annihilation Of Caste In Hindi Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Annihilation Of Caste In Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Annihilation Of Caste In Hindi Pdf Download कर सकते हैं और यहां से Kattarvad pdf Hindi कर सकते है।

 

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Annihilation Of Caste In Hindi Pdf Download

 

 

 

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Annihilation Of Caste In Hindi Pdf
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

वह दोनों अभी कुछ देरी में आ जाएँगी कार्तिक ने घड़ी देखते हुए कहा। ठीक पांच बजे रचना और प्रिया ऑफिस में आ गयी थी। ऑफिस में मालिक की कुर्सी पर विराजमान एक बुजुर्ग को देखकर उन दोनों को समझते देर नहीं लगी कि यही कार्तिक के पिता और कम्पनी वरिष्ठ मालिक है।

 

 

 

 

रचना और प्रिया ने उन्हें प्रणाम किया और अपने कार्य में लग गयी। पराग रचना को देख रहे थे  जो कभी फ़ाइल देखती कभी कम्प्यूटर चलाने लगती थी। रचना और आभा के चेहरे में बहुत ज्यादा समानता थी लेकिन आभा की परख अभी बाक़ी थी जबकि रचना अपनी कर्मठता की पराकाष्ठा पर थी।

 

 

 

 

अपनी तरफ पराग को देखते हुए रचना बोली – क्या देख रहे है पिताजी? पराग बोले – तुम्हारी इतनी कर्मठता पर तुम्हे किसी कम्पनी का मालकिन होना चाहिए था। पराग की बात सुनकर रचना हँसते हुए बोली – ऊपर वाले का आशीर्वाद और आपका भरोसा रहेगा तो असंभव लगने वाली बात भी संभव हो सकती है।

 

 

 

 

रचना फिर कम्प्यूटर से खेलने लगी उसके लिए कम्प्यूटर और फ़ाइल एक खेल ही तो था। वह फ़ाइल में लिखे हुए प्रत्येक हिसाब को कम्प्यूटर के अंदर भर दे रही थी। प्रिया कम्प्यूटर पर ही दुकान और कम्पनी की दिन भर की सारी जानकारी एकत्रित करते हुए पराग को बताते जा रही थी।

 

 

 

 

आज राजिंदर सिंह कार्तिक के साथ आया था कम्पनी में। कार्तिक उसे घुमाते हुए सब कुछ दिखा रहा था। कैसे हाथ के द्वारा तौलिया, चद्दर, रुमाल इत्यादि बनाये जा जा रहे थे और उनकी सफाई और पैकिंग करने में किस तरह से औरत कर्मचारियों की भागीदारी हो रही थी।

 

 

 

 

रजिंददर कार्तिक के साथ घूमते हुए कहने लगा – अगर इस हैंडलूम को आप पावरलूम में बदल देंगे तो कम्पनी का उत्पादन बहुत तीव्र गई से होने लगेगा और समय की बचत भी होगी। कार्तिक बोला – सुझाव तो ठीक है लेकिन बदलाव करने में समय का अपव्यय होगा।

 

 

 

 

राजिंदर बोला – बिना अपव्यय के बदलाव संभव नहीं होता है। कार्तिक ने राजिंदर से कहा – कल से तुम्हारे लिए दुकान और कम्पनी का सारा हिसाब तथा कर्मचारियो की अन्य सारी सुविधा तथा आवश्यकताओ को रचना और प्रिया को बताना होगा और यही कार्य प्रतिदिन करना होगा और वेतन के लिए तुम माता जी से बात कर सकते हो।

 

 

 

 

वह जितना कहेंगी तुम्हे उतना वेतन मिल जाया करेगा। धीरे-धीरे राजिंदर को कम्पनी के कार्य स्थल में एक महीना हो गया था। उसे कार्तिक के विषय में कही कोई अप्रिय बात नहीं सुनाई पड़ी थी। भोजन बनाते समय एक दिन केतकी ने  आभा से पूछा जो राजिंदर के रूप में भोजन बनाने में उसका सहयोग कर रही थी क्या तुम्हे कार्तिक को परखने में संतुष्टि हुई?

 

 

 

 

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