Advertisements

Ank Jyotish Ki Kitab Pdf / अंक ज्योतिष की किताब Pdf

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Ank Jyotish Ki Kitab Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Ank Jyotish Ki Kitab Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से कीरो अंक विज्ञान PDF और  हस्त रेखा ज्ञान इन हिंदी Pdf Download कर सकते हैं।

 

Advertisements

 

 

 

Ank Jyotish Ki Kitab Pdf / अंक ज्योतिष की किताब पीडीऍफ़ 

 

 

 

Advertisements
Ank Jyotish Ki Kitab Pdf
अंक ज्योतिष की किताब पीडीएफ डाउनलोड 
Advertisements

 

 

 

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

दोहा का अर्थ-

 

 

 

इस प्रकार का संयोग होने से जब सुंदरता और सुख की मूल लक्ष्मी उत्पन्न हो, तो भी कवि लोग उसे बहुत ही संकोच के साथ सीता जी के समान कहेंगे।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- सयानी सखियां सीता जी को साथ लेकर, मनोहर वाणी से गीत गाती हुई चली। सीता जी के नवल शरीर पर सुंदर साड़ी सुशोभित है। जगत जननी की महान छवि अतुलनीय है।

 

 

 

2- सब आभूषण अपनी-अपनी जगह पर शोभित है, जिन्हे सखियों ने अंग-अंग में भली भांति सजाते हुए पहनाया है। जब सीता जी ने रंगभूमि में पैर रखा, तब उनका दिव्य स्वरुप देखकर सभी स्त्री-पुरुष मोहित हो गए।

 

 

 

 

3- नगाड़े बजाते हुए सभी देवता हर्षित थे। गाते हुए अप्सराये फूलो को बरसाने लगी , सीता जी के कर कमलो जयमाल सुशोभित है। सब राजा उनकी ओर देखते हुए चकित हो जाते है।

 

 

 

4- सब राजा लोग मोह के बस हो गए, सीता जी श्री राम जी को चकित चित्त से देखने लगी। सीता जी ने मुनि के पास बैठे हुए दोनों भाइयो को देखा तो उनके नेत्र अपनी निधि को पाकर ललचाते हुए वही श्री राम जी में लगकर स्थिर हो गए।

 

 

 

 

248- दोहा का अर्थ-

 

 

 

परन्तु गुरुजनो की लाज से और बहुत बड़ा समाज देखकर सीता जी सकुचा गई, वह श्री राम जी को हृदय में लाकर सखियों की ओर देखने लगी।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- श्री राम जी का रूप और सीता जी की छवि को देखकर सभी स्त्री-पुरुषो ने पलक झपकाना ही छोड़ दिया, सभी एकटक उन्हें देखने लगे, सभी लोग अपने मन में सोचते है, पर कहते हुए सकुचाते है। मन ही मन वह विधाता से विनय करते है।

 

 

 

2- हे विधाता! जनक जी की मूढ़ता को शीघ्र हर लीजिए और हमारे जैसी सुंदर बुद्धि उन्हें दीजिए कि जिससे बिना विचार किए ही राजा अपना प्रण छोड़कर सीता जी का विवाह श्री राम जी से कर दे।

 

 

 

3- संसार उन्हें भला कहेगा क्योंकि यह बात सभी को अच्छी लगती है। हठ करने से अंत में हृदय ही जलेगा। यह सांवला वर ही जानकी जी के योग्य है। सब लोगो की यही लालसा है।

 

 

 

4- तब राजा जनक ने बंदीजनों को बुलाया, वह विरुदावली (वंश की कीर्ति) गाते हुए चले आये, राजा ने कहा – जाकर मेरा प्रण सबसे कह दो – भाट चले उन्हें हृदय में कम आनंद नहीं था।

 

 

 

पुत्र के वियोग से और कौन सी अधिक व्यथा होगी जिसके दुःख से प्राण शरीर को छोड़ेंगे। फिर धीरज धरकर राजा ने सुमंत्र से कहा हे सखा तुम रथ लेकर श्री राम जी के साथ जाओ।

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Ank Jyotish Ki Kitab Pdf आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और इस तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

 

Leave a Comment

error: Content is protected !!