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Anil Mohan Novels Devraj Chauhan Series Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Anil Mohan Novels Devraj Chauhan Series Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Anil Mohan Novels Devraj Chauhan Series Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से 5 + Detective Novels in Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

सुबह उठकर भोजन तैयार करना ऑफिस जाना कम्पनी और दुकान का सारा कार्य देखना आभा का नियम बन गया था। आभा पराग और केतकी का बहुत ध्यान रखती थी। वह तो पराग को ऑफिस जाने से भी मना करती थी लेकिन पराग आभा की सहायता के लिए अवश्य ही कम्पनी में जाते थे।

 

 

 

प्रिया और रचना के आने के बाद सात बजे तक आभा पराग को लेकर घर आ जाती थी। आभा की इस कार्य कुशलता को देखकर पराग के लिए रचना आभा में अंतर करना बहुत कठिन हो गया था। राजिंदर का भेद अब रचना और प्रिय को भी मालूम हो गया था।

 

 

 

इन तीनो के बीच अच्छा ताल मेल था जिससे कम्पनी और दुकान के कर्मचारियों में कोई परेशानी नहीं होती थी बल्कि कार्य में विविधता के साथ ही तीव्रता आ गयी थी। एक पराग केतकी से बोले – तुमने हमे एकदम बीच राते पर लाकर खड़ा कर दिया है।

 

 

 

यहां समझ में नहीं आ रहा है कि में कौन से रास्ते पर चलूँ क्योंकि सभी रास्ते अपनी सुंदरता से भरे है। केतकी पराग से बोली – आप पहेलियाँ मत बुझाओ सीधी बात कहो। पराग बोले – सीधी बात यह है कि हमारे लिए रचना और आभा के बीच चुनाव करना बहुत कठिन हो गया है।

 

 

 

 

केतकी बोली – अवश्य ही कोई रास्ता निकलेगा। पराग बोले – अगर कोई रास्ता नहीं निकला तब हम क्या करेंगे? फ़िलहाल आभा को उसके गांव मोहनपुर भेजना है। आप फोन करके कार्तिक को बता दीजिए कि घर का कार्य शीघ्रता से कराये और एक महीने में घर का आधा कार्य होने के बाद ही कलकत्ता आये।

 

 

 

 

पराग एक दिन आभा से बोले – बेटी परसो तुम्हे गांव भेजना है क्या तुम अकेले ही चली जाओगी? आभा बोली – एक रात की यात्रा है सुबह वाराणसी स्टेशन पर उतर जाउंगी वहां हमारे बड़े पिताजी का लड़का हमे अपने साथ ले जाने के लिए आ जायेगा हमने उसे फोन करके बता दिया है।

 

 

 

 

हमारे नहीं रहने पर विनीत ही पिताजी का सारा व्यापार कानपुर से लेकर इंदौर तक संभालता है। पराग बोले – तुम्हे यहां कोई परेशानी तो नहीं हुई। आभा बोली – मांजी हमारे विषय में पहले ही जान चुकी थी हमे उनका पूर्ण रूप से सहयोग मिला नहीं तो परेशानी तो होनी ही थी।

 

 

 

 

यहां हमे सभी को समझने का मौका मिला रचना और प्रिया तो बहुत साहसी है। बैंक मैनेजर होते हुए भी रचना दीदी खाली समय का उपयोग करके उससे अर्जित रुपये का उपयोग दुखियो की सेवा में कर देती है और साथ ही कम्पनी और दुकान का सारा हिसाब प्रिया दीदी के सहयोग से हरदम सही रखती है।

 

 

 

 

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