Advertisements

Andha Yug Pdf in Hindi / अंधा युग धर्मवीर भारती Pdf

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Andha Yug Pdf in Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Andha Yug Pdf in Hindi download कर सकते हैं और आप यहां से Sare Jahan Se Acha Lyrics Pdf कर सकते हैं।

Advertisements

 

 

 

Andha Yug Pdf in Hindi Download

 

 

पुस्तक का नाम  Andha Yug Pdf in Hindi
पुस्तक के लेखक  धर्मवीर भारती 
फॉर्मेट  Pdf 
साइज  1.1 Mb 
पृष्ठ  138 
भाषा  हिंदी 
श्रेणी  नाटक 

 

 

 

Advertisements
Andha Yug Pdf in Hindi
Andha Yug Pdf in Hindi Download यहां से करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
खौफनाक खेल हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
भोकाल हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
अतिक्रूर भोकाल हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
तिलिस्म टूट गया हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
अतिक्रूर गोजख़ हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
कपाला हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
गुरुत्वा हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
भोकाल का काल हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
भंवर हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

Advertisements
Bhokal Comics Pdf
फ्लेमिना हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected]mail.com पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

अँधा युग के बारे में 

 

 

इनका जन्म इलाहाबाद के अतरसुइया मुहल्ले में 25 दिसंबर 1926 को चिरंजी लाल वर्मा तथा चंदा देवी के सुपुत्र के रूप में हुआ था। धर्मवीर भारती के व्यक्तित्व और प्रारंभिक रचनाओं पर पंडित माखन लाल चतुर्वेदी काव्य संस्कारो का काफी प्रभाव पड़ा था।

 

 

 

धर्मवीर भारती ने प्रयाग विश्वविद्यालय में अध्यापन के दौरान ‘हिंदी साहित्य कोष’ के संपादन में सहयोग दिया था। वह आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि और सामाजिक विचारक के साथ नाटककार भी थे।

 

 

 

इनके द्वारा लिखित पहले उपन्यास ‘गुनाहो का देवता’ को बहुत प्रसिद्धि प्राप्त हुई थी। इन्होने ‘आलोचना’ पत्रिका का संपादन भी किया था। उसके पश्चात उन्होंने प्रख्यात सप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ का बहुत कुशलता के साथ संपादक पद का संचालन किया।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

धरणी! तुम धन्य हो! मेरे इस पुत्र का प्रेम पूर्वक पालन करो। यह श्रेष्ठ शिशु मुझ महातेजस्वी शंभु के श्रमजल से तुम्हारे ही ऊपर उत्पन्न हुआ है। वसुधे! यह प्रियकारी बालक यद्यपि मेरे श्रमजल से प्रकट हुआ है तथापि तुम्हारे नाम से तुम्हारे ही पुत्र के रूप में इसकी ख्याति होगी।

 

 

 

यह सदा त्रिविधि तापो से रहित होगा। अत्यंत गुणवान और भूमि देने वाला होगा। यह मुझे भी सुख प्रदान करेगा। तुम इसे अपनी रुचि के अनुसार ग्रहण करो। ब्रह्मा जी कहते है – नारद! ऐसा कहकर भगवान शिव चुप हो गए। उनके हृदय से विरह का प्रभाव कुछ कम हो गया।

 

 

 

उनमे विरह क्या था, वे लोकाचार का पालन कर रहे थे। वास्तव में सत्पुरुषों के प्रिय श्री रुद्रदेव निर्विकार परमात्मा ही है। शिव की उपर्युक्त आज्ञा को शिरोधार्य करके पुत्र सहित पृथ्वी देवी शीघ्र ही अपने स्थान को चली गयी। उन्हें आत्यंतिक सुख मिला।

 

 

 

वह बालक भौम नाम से प्रसिद्ध हो युवा होने पर तुरंत काशी चला गया और वहां उसने दीर्घकाल तक भगवान शंकर की सेवा की। विश्वनाथ जी की कृपा से ग्रह की पदवी पाकर भूमिकुमार शीघ्र ही श्रेष्ठ एवं दिव्यलोक में चले गए। जो शुक्र लोक से परे है।

 

 

 

ब्रह्मा जी कहते है – नारद! हिमवान की पुत्री लोकपूजित शक्तिस्वरूपा पार्वती हिमालय के घर में रहकर बढ़ने लगी। जब उनकी अवस्था आठ वर्ष की हो गयी तब सती के विरह से कातर हुए शंभु को उनके जन्म का समाचार मिला। नारद! उस अद्भुत बालिका पार्वती को हृदय में रखकर वे मन ही मन बड़े आनंद का अनुभव करने लगे।

 

 

 

इसी बीच में लौकिक गति का आश्रय ले शंभु ने अपने मन को एकाग्र करने के लिए तप करने का विचार किया। नंदी आदि कुछ शांत पार्षदों को साथ ले वे हिमालय के उत्तम शिखर पर गंगावतार नामक तीर्थ में चले आये जहां पूर्वकाल में ब्रह्मधाम से च्युत होकर समस्त पापराशि का विनाश करने के लिए चली हुई परम पावनी गंगा पहले पहल भूतल पर अवतीर्ण हुई थी।

 

 

 

जितेन्द्रिय हर ने वही रहकर तपस्या आरंभ की। वे आलस्यरहित हो चेतन, ज्ञानस्वरूप, नित्य, ज्योतिर्मय, निरामय, जगन्मय, चिदानंद स्वरुप, द्वैतहीन तथा आश्रयरहित अपने आत्मभूत परमात्मा का एकाग्र भाव से चिंतन करने लगे। भगवान हर के ध्यान परायण होने पर नंदी भृंगी आदि कुछ अन्य पार्षदगण भी ध्यान में तत्पर हो गए।

 

 

 

उस समय कुछ ही प्रमथगण परमात्मा शंभु की सेवा करते थे। वे सब के सब मौन रहते और एक शब्द भी नहीं बोलते थे। कुछ द्वारपाल हो गए थे। इसी तरह गिरिराज हिमवान उस ओषधि बहुल शिखर पर भगवान शंकर का शुभागमन सुनकर उनके प्रति आदर की भावना से वहां आये।

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Andha Yug Pdf in Hindi आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Andha Yug Pdf in Hindi की तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

Leave a Comment

Advertisements
error: Content is protected !!