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Akram Allahabadi Novels Hindi Pdf / आखिरी गोली नावेल Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Akram Allahabadi novels Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Akram Allahabadi novels Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Karnal Ranjeet Novel Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

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Akram Allahabadi novels Hindi Pdf Download

 

 

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Akram Allahabadi novels Hindi Pdf
आखिरी गोली नावेल Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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आभा कार्तिक से बोली – अब शायद आप समझ गए होंगे कि राजिंदर कौन था? आभा के इस स्पष्ट उत्तर से कार्तिक संतुष्ट था लेकिन इससे उसका अहं थोड़ी रुकावट पैदा कर रहा था। उसी पल उसका फोन बजने लगा। दूसरी तरफ से पराग बोल रहे थे कि रचना की तबियत बहुत खराब हो गयी है कम्पनी और दुकान को संभालने में परेशानी हो रही है।

 

 

 

 

तुम जल्दी से कलकत्ता चले आओ। कार्तिक ने केशरी से कहा – चाचा हमे आज ही कलकत्ता जाना होगा क्योंकि वहां रचना की तबीयत खराब हो गयी पिता जी के लिए कम्पनी और दुकान संभालने में परेशानी हो रही है। आप कीरतपुर जाकर वहां बनते हुए मकान का जायजा लेते रहना  से कलकत्ता के लिए जा रहा हूँ।

 

 

 

 

कार्तिक वाराणसी के लिए निकल गया जबकि रचना का नाम सुनकर सूरज थोड़ा परेशान हो गए थे। केशरी अपने गांव लोचन खेड़ा चले गए। अब सूरज ने आभा से पूछा – कार्तिक के कम्पनी में यह रचना कौन है और उसका कार्तिक से क्या संबंध है?

 

 

 

 

आभा बोली – रचना कार्तिक के कम्पनी में वरिष्ठ कर्मचारी है जो अपनी सहेली प्रिया के साथी कम्पनी और दुकान की सारी जिम्मेदारी संभालती है। वह मेरी ही प्रतिकृति है। आभा ने एक फोटो निकालकर सूरज को दिखाते हुए कहा यही रचना दास है।

 

 

 

 

सूरज ने रचना का फोटो देखा उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। वह कभी रचना की फोटो देखते और दूसरे ही पल आभा को देखने लगते। उन्हें दोनों में कही भी फर्क नहीं दिखता था। आभा बोली – बड़े पिता जी मैं विनीत भइया को लेकर कल ही रचना दीदी को देखने के लिए कलकत्ता जाउंगी।

 

 

 

 

लेकिन तुम्हारा वहां जाना क्या उचित है? सूरज आभा के पिता के बड़े भाई थे। अपने घर की सारी जिम्मेदारी वही संभालते थे। वह आभा से बोले – तुम्हे वहां कोई भी नहीं पहचानता है कही तुम्हारे लिए कोई परेशानी तो नहीं खड़ी हो जाएगी क्योंकि तुम वहां आभा नहीं राजिंदर के रूप में गयी थी।

 

 

 

 

आभा सूरज से बोली – बड़े पिता जी! वहां मुझे कार्तिक की माता जी अच्छी तरह से पहचानती है। हमे उनकी तरफ से पूर्ण रूप से सहयोग प्राप्त था इसलिए अब वहां कोई परेशानी नहीं होगी। सूरज बोले – ठीक है तुम कल विनीत को साथ लेकर कलकत्ता के लिए चली जाना।

 

 

 

 

कार्तिक दूसरे दिन कलकत्ता पहुँच गया था। कम्पनी और दुकान में जाकर पूरी व्यवस्था देखने के बाद वह उस अस्पताल में गया जहां रचना भर्ती थी। पराग उसकी देखभाल में लगे हुए थे। रचना की सहेली प्रिया कम्पनी और दुकान का संचालन बहुत कुशलता के साथ करते हुए रचना की सहायता के लिए भी समय निकाल लेती थी।

 

 

 

 

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