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अग्नि पुराण Pdf / Agni Puran Pdf Hindi

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Agni Puran Pdf Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Agni Puran Pdf Hindi download कर सकते हैं और आप यहां से Sukh Sagar pdf Hindi कर सकते हैं।

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Agni Puran Pdf Hindi

 

 

पुस्तक का नाम  Agni Puran Pdf Hindi
पुस्तक के लेखक  महर्षि व्यास 
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी 
साइज  51 Mb 
पृष्ठ  842 
श्रेणी  धार्मिक 

 

 

 

अग्नि पुराण Pdf Download

 

 

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Agni Puran Pdf Hindi
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देवशक्ति एक अद्भुत दिव्यास्त्र Pdf Download
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अग्नि पुराण का श्रवण करने वाले व्यक्ति को भूत-प्रेत तथा पिशाच आदि व्यथित नहीं कर सकते है। जिस घर में अग्नि पुराण की पुस्तक होती है वहां किसी भी प्रकार की विघ्न बाधाएं नहीं रहती है। अग्नि पुराण के श्रवण से, क्षत्रिय राज्य सत्ता का स्वामी, ब्राह्मण ब्रह्म वेत्ता, वैश्य धनाढ्य और शूद्र निरोगी काया प्राप्त करता है।

 

 

अग्नि पुराण का वर्णन अग्नि देव ने स्वयं अपने मुख से वसिष्ठ मुनि को सुनाया था। अग्नि पुराण की कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। अग्नि पुराण श्रवण करने के लिए श्रावण, भाद्रपक्ष, अश्विन, माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ मास को उत्तम माना गया है।

 

 

पद्म पुराण के अनुसार सभी पुराणों को भगवान विष्णु का मूर्त रूप बताया गया है। भगवान विष्णु के विभिन्न अंग को ही पुराण कहा गया है। इसी दृष्टि से अग्नि पुराण को श्री हरि का बायां चरण कहा गया है। अग्नि पुराण में अनेको विद्याओ का समन्वय प्राप्त होता है।

 

 

यथा भगवान कृष्ण के वंश का वर्णन, वास्तु पूजा विधि, सर सम्वत के नाम, सृष्टि का वर्णन, अभिषेक करने की विधि, उत्पात शांति की विधि, श्राद्ध कल्प, तत्व दीक्षा इत्यादि का समावेश है। अग्नि पुराण बहुत ही प्राचीन पुराण है। शास्त्रीय व विषयगत दृष्टि से भी वह पुराण बहुत ही महत्वपूर्ण है।

 

 

अग्नि पुराण का आयोजन करने के लिए विद्वान ब्राह्मण का होना आवश्यक है। उस विद्वान ब्राह्मणो को वेदो का सम्यक ज्ञान होना चाहिए। इसमें जितने भी ब्राह्मण रहे उनके आचरण शुद्ध होने चाहिए। ब्राह्मण के लिए गायत्री मंत्र और संध्या वंदन करना चाहिए। ब्राह्मण तथा यजमान को सात दिनों तक उपवास रखना चाहिए तथा एक समय भोजन करने का विधान है।

 

 

अग्नि पुराण में महाराज मनु के द्वारा भगवान मत्स्य की नाना प्रकार के स्तोत्रों द्वारा स्तुति का वर्णन प्राप्त होता है। प्रलय के अंत में ब्रह्मा जी से वेद को हरने वाले ‘हयग्रीव’ नामक दानव का वध और वेद मंत्र आदि की भगवान विष्णु द्वारा रक्षा करने का भी वर्णन प्राप्त होता है।

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

क्या घर-घर में अपने रूप और लावण्य पर गर्व करने वाली स्त्रियां नहीं है? परन्तु पतिव्रता स्त्री तो विश्वनाथ शिव के प्रति भक्ति होने से ही प्राप्त होती है। भार्या से ही इस लोक और परलोक दोनों पर विजय पायी जा सकती है। भार्याहीन पुरुष देवयज्ञ, पितृयज्ञ और अतिथियज्ञ करने का अधिकारी नहीं होता।

 

 

 

वास्तव में गृहस्थ वही है जिसके घर में पतिव्रता स्त्री है। दूसरी स्त्री तो पुरुष को उसी तरह अपना ग्रास बनाती है जैसे जरावस्था। जैसे गंगा स्नान करने से शरीर पवित्र होता है उसी प्रकार पतिव्रता स्त्री का दर्शन करने पर सब कुछ पावन हो जाता है। पति को ही इष्ट देव मानने वाली सती नारी और गंगा में कोई भेद नहीं है।

 

 

 

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