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Adi Shankaracharya books in Hindi Pdf / आदि शंकराचार्य बुक्स Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Adi Shankaracharya books in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Adi Shankaracharya books in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Sampurn Gurucharitra Pdf Hindi कर सकते हैं।

 

 

 

Adi Shankaracharya books in Hindi Pdf Download

 

 

 

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Adi Shankaracharya books in Hindi Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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परापूजा Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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स्वामी रामतीर्थ Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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तैत्तिरीयोपनिषद Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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सुबोधप्रभाकर Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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पंचीकरणम Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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आत्मबोध Pdf By आदि शंकराचार्य यहां से डाउनलोड करे।
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मंत्र शास्त्र Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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Mantra Sagar Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

देवताओ और ऋषियों ने आत्मसिद्धि के लिए अपने हाथ से वैदिक मंत्रो के उच्चारण पूर्वक शुद्ध मंडल में शुद्ध भावना द्वारा जिस उत्तम शिव लिंग की स्थापना की है उसे पौरुष लिंग कहते है तथा वही प्रतिष्ठित लिंग कहलाता है। उस लिंग की पूजा करने से सदा पौरुष ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

 

 

 

 

महान ब्राह्मण और महाधनी राजा किसी कारीगर से शिव लिंग का निर्माण कराकर जो मंत्रपूर्वक उसकी स्थापना करते है उनके द्वारा स्थापित हुआ वह लिंग भी प्रतिष्ठित लिंग कहलाता है किन्तु वह प्राकृत लिंग है। इसलिए प्राकृत ऐश्वर्य भोग को ही देने वाला होता है।

 

 

 

 

जो शक्तिशाली और नित्य होता है उसे पौरुष कहते है तथा जो दुर्बल और अनित्य होता है वह प्राकृत कहलाता है। लिंग, जिह्वा, नाभि, नासाग्रभाग और शिखा के क्रम से कटि हृदय और मस्तक तीनो स्थानों से जो लिंग की भावना की गयी है उस आध्यात्मिक लिंग को ही चर लिंग कहते है।

 

 

 

 

पर्वत और पौरुष लिंग बताया गया है और भूतल को विद्वान पुरुष प्राकृत लिंग मानते है। वृक्ष आदि को पौरुष लिंग जानना चाहिए और गुल्म आदि को प्राकृत लिंग। साठी नामक धान्य को प्राकृत लिंग समझना चाहिए और शालि एवं को गेहू को पौरुष लिंग।

 

 

 

 

अणिमा और आठो सिद्धियों को देने वाला जो ऐश्वर्य है उसे पौरुष ऐश्वर्य जानना चाहिए। सुंदर स्त्री तथा धन आदि विषयो को आस्तिक पुरुष प्राकृत ऐश्वर्य कहते है। चरलिंगो में सबसे प्रथम रसलिंग का वर्णन किया जाता है। रसलिंग ब्राह्मणो को उनकी सारी अभीष्ट वस्तुओ को देने वाला है।

 

 

 

 

शुभकारक बाणलिंग क्षत्रियो को महान राज्य की प्राप्ति कराने वाला है। सुवर्णलिङ्ग वैश्यों को महाधनपति का पद प्रदान करने वाला है तथा सुंदर शिव लिंग शुद्रो को महशुद्धि देने वाला है। स्फटिकमय लिंग तथा बाणलिंग सब लोगो को उनकी समस्त कामनाए प्रदान करते है।

 

 

 

 

अपना न हो तो दूसरे का स्फटिक या बाणलिंग भी पूजा के लिए निषिद्ध नहीं है। स्त्रियों, विशेषतः सधवाओ के लिए पार्थिव लिंग की पूजा का विधान है। प्रवृत्ति मार्ग में स्थित स्फटिक लिंग की पूजा बताई गयी है। परन्तु विरक्त रसलिंग की पूजा को ही श्रेष्ठ कहा गया है।

 

 

 

 

उत्तम व्रत का पालन करने वाले महर्षियो! बचपन में, जवानी में और बुढ़ापे में भी शुद्ध स्फटिकमय शिव लिंग का पूजन स्त्रियों को समस्त भोग प्रदान करने वाला है। गृहासक्त स्त्रियों के लिए पीठपूजा भूतल पर सम्पूर्ण अभीष्ट को देने वाली है।

 

 

 

 

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