Advertisements

Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf / अचीव मोर सक्सीड फास्टर Pdf

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Motu Patlu comics in Hindi pdf कर सकते हैं।

Advertisements

 

 

 

Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf Download

 

 

 

Advertisements
Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf
Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Life Ke Kadve Sach book Pdf
Life Ke Kadve Sach book Pdf यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf
Mental health Books pdf in Hindi यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

वह सब देखकर ऋषि, इन्द्रादि देवता, मरुद्गण, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार और लोकपाल चुप ही रहे। कोई सब ओर से आ आकर वहां भगवान विष्णु से प्रार्थना करते थे कि किसी तरह विघ्न टल जाए। वे उद्विग्न हो बारंबार विघ्न निवारण के लिए आपस में सलाह करने लगे।

 

 

 

प्रमथगणो के नाश होने और भगाये जाने से जो भावी परिणाम होने वाला था उसका भली-भांति विचार करके उत्तम बुद्धि वाले श्री विष्णु आदि देवता अत्यंत उद्विग्न हो उठे। मुने! इस प्रकार दुरात्मा शंकर द्रोही ब्रह्मबंधु दक्ष के यज्ञ में उस समय बड़ा भारी विघ्न उपस्थित हो गया।

 

 

 

 

ब्रह्मा जी कहते है – मुनीश्वर! इसी बीच में वहां दक्ष तथा देवता आदि  हुए आकाशवाणी ने यह यथार्थ बात कही – रे-रे दुराचारी दक्ष! ओ दंभाचरणपरायण महामूढ़! यह तूने कैसा अर्थकारी कर्म कर डाला? ओ मुर्ख! शिव भक्तराज दधीचि के कथन को भी तूने प्रामाणिक नहीं माना जो तेरे लिए सब प्रकार से आनंददायक और मंगलकारी था।

 

 

 

वे ब्राह्मण देवता तुझे दुस्सह शाप देकर तेरी यज्ञशाला से निकल गए तो भी तुझ मूढ़ ने अपने मन में कुछ भी नहीं समझा। उसके बाद तेरे घर में मंगलमयी सती देवी स्वतः पधारी जो तेरी अपनी ही पुत्री थी किन्तु तूने उनका भी परम आदर नहीं किया ऐसा क्यों हुआ?

 

 

 

ज्ञानदुर्बल दक्ष! तूने सती और महादेव जी की पूजा नहीं की यह क्या किया? मैं ब्रह्मा जी का बेटा हूँ ऐसा समझकर तू व्यर्थ ही घमंड में भरा रहता है और इसीलिए तुझपर मोह छा गया है। वे सती देवी ही सत्पुरुषों की आराध्या देवी है। वे समस्त पुण्यो का फल देने वाली तीनो लोको की माता कल्याणकारी स्वरूपा और भगवान शंकर के आधे अंग में निवास करने वाली है।

 

 

 

वे सती देवी ही पूजित होने पर सदा सम्पूर्ण सौभाग्य प्रदान करने वाली है। वे ही महेश्वर की शक्ति है और अपने भक्तो को सब प्रकार के मंगल देती है। वे सती देवी ही पूजित होने पर सदा संसार का भय दूर करती है। मनोवांछित फल देती है तथा वे ही समस्त उपद्रवों को नष्ट करने वाली देवी है।

 

 

 

वे सती ही सदा पूजित होने पर कीर्ति और सम्पत्ति प्रदान करती है। वे ही पराशक्ति तथा भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली परमेश्वरि है। वे ही जगत को जन्म देने वाली माता जगत की रक्षा करने वाली अनादि शक्ति और प्रलयकाल में जगत का संहार करने वाली है।

 

 

 

वे जगन्माता सती ही भगवान विष्णु की मातरूप से सुशोभित होने वाली तथा ब्रह्मा, इंद्र, चंद्र, अग्नि एवं सूर्यदेव आदि की जननी मानी गयी है। वे सती ही तप धर्म और दान आदि का फल देने वाली है। वे ही शंभुशक्ति महादेवी है तथा दुष्टो का हनन करने वाली परात्पर शक्ति है।

 

 

 

ऐसी महिमा वाली सती देवी जिनकी सदा प्रिय धर्मपत्नी है उन भगवान महादेव को तूने यज्ञ में भाग नहीं दिया। अरे! तू कैसा मूढ़ और कुविचारी है। भगवान शिव ही सबके स्वामी तथा परात्पर परमेश्वर है। वे समस्त देवताओ के सम्यक सेव्य है और सबका कल्याण करने वाले है।

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Achieve More Succeed Faster Hindi Pdf की तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

Leave a Comment

Advertisements
error: Content is protected !!