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औषधीय पौधों के नाम और उपयोग पीडीऍफ़ डाउनलोड

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको औषधीय पौधों के नाम और उपयोग Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से औषधीय पौधों के नाम और उपयोग Pdf Download कर सकते हैं।

 

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औषधीय पौधों के नाम और उपयोग Pdf / औषधीय पौधों के नाम और उपयोग पीडीऍफ़

 

 

 

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औषधीय पौधों के नाम और उपयोग पीडीऍफ़ डाउनलोड
औषधीय पौधों के नाम और उपयोग पीडीएफ डाउनलोड 
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औषधीय पौधों के नाम व उपयोग
Aushadhiya Paudho Ke Nam Aur Upyoga Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

आपके यश रूपी मान सरोवर में  हंसिनी बनी हुई आपके गुण समूह रूपी मोतियों को चुगती रहती है, हे राम जी! आप उसके हृदय में बसिये।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- जिसकी नासिका प्रभु आपके पवित्र और सुगंधित पुष्पादि सुंदर प्रसाद को नित्य आदर के साथ ग्रहण करती और सूंघती है और जो आपको अर्पण करते हुए भोजन करते है और आपके प्रसाद रूप ही वस्त्राभूषण धारण करते है।

 

 

 

 

2- जिनके मस्तक देवता, गुरु और ब्राह्मणो को देखकर बड़ी नम्रता के साथ प्रेम सहित झुक जाते है जिनके हाथ नित्य ही आपकी पूजा करते है और जिनके हृदय में केवल आपका ही भरोसा है दूसरा नहीं।

 

 

 

3- तथा जिनके चरण आपके तीर्थो में चलकर जाते है, हे राम जी! आप उनके मन में निवास कीजिए। जो नित्य आपके (राम नाम रूप) मंत्र राज का जाप करते है और परिवार (परिकर) सहित आपकी पूजा करते है।

 

 

 

 

4- जो अनेक प्रकार से तर्पण और हवन करते है तथा ब्राह्मणो को भोजन कराकर बहुत सारा दान देते है तथा जो अपने हृदय में गुरु को आप से अधिक बड़ा जानकर सर्वभाव से सम्मान करके उनकी सेवा करते है।

 

 

 

129- दोहा का अर्थ-

 

 

 

और यही सब कर्म करते हुए सबका यही फल मांगते है कि श्री राम जी के चरणों में हमारी प्रीति बनी रहे, उन लोगो के मन रूपी मंदिर में सीता जी और रघुकुल को आनंद देने वाले आप दोनों बसिए।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- जिनके न तो काम, क्रोध, मोह, मद और अभिमान है, न लोभ है, न क्षोभ है, न राग है, न द्वेष है, और न कपट दंभ और माया ही है – हे रघुराज! आप उनके हृदय में निवास कीजिए।

 

 

 

 

2- सबका हित करने वाले और उसका प्रिय चाहने वाले है, जिन्हे दुःख और सुख तथा प्रसंशा और निंदा समान है, जो विचार कर और प्रिय वचन बोलते है, तथा जो जागते हुए और सोते हुए आपके ही शरण में रहते है।

 

 

 

 

3- और आपको छोड़कर उनकी कोई गति (आश्रय) नहीं है, हे राम जी! आप उनके मन में बसिए। जो पराई स्त्री को जन्म देने वाली माता के समान जानते है और पराया धन जिन्हे विष के समान लगता है।

 

 

 

 

4- जो दूसरे की समपत्ति देखकर हर्षित होते है और दूसरे के दुःख को देखकर विशेष रूप से दुखी हो जाते है। हे राम जी! जिन्हे आप प्राणो के समान प्यारे है, उनके मन आपके रहने योग्य शुभ भवन है।

 

 

 

 

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